मशहूर पंजाबी सूफी गायक खान साहब का असली नाम 'इमरान खान' है। उनका जन्म पंजाब के कपूरथला जिले के एक बेहद सीधे-साधे और मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनके घर का माहौल थोड़ा संगीत की तरफ झुका हुआ था, जिसके कारण इमरान खान का मन भी पढ़ाई-लिखाई से ज्यादा सुर और ताल को समझने में लगता था। पंजाब की संस्कृति और मिट्टी की खुशबू उनके अंदर रची-बसी थी, और यही वजह है कि उन्होंने बहुत ही कम उम्र में यह तय कर लिया था कि वह आगे चलकर केवल संगीत की दुनिया में ही अपना नाम कमाएंगे।
खान साहब के अगर पारिवारिक बैकग्राउंड की बात करें, तो उनका पूरा परिवार कला और संगीत से बहुत गहरा लगाव रखता है। उनके माता-पिता ने उनके हुनर को बचपन में ही पहचान लिया था और कभी भी उन पर किसी दूसरे करियर को चुनने का दबाव नहीं बनाया। सितंबर 2025 में खान साहब के जीवन में एक बहुत बड़ा झटका लगा जब उनकी माता जी 'सलमा परवीन' का लंबी बीमारी के बाद इंतकाल हो गया, जो उनके दिल के सबसे करीब थीं। इस मुश्किल दौर में भी उनके परिवार ने और उनके भाई-बहनों ने उन्हें संभाला और संगीत के प्रति उनके जुनून को कभी कम नहीं होने दिया।
बहुत से लोग यह जानने के लिए उत्सुक रहते हैं कि इमरान खान का नाम 'खान साहब' कैसे पड़ा। इसके पीछे पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री के सुपरस्टार गैरी संधू (Garry Sandhu) का हाथ है। जब खान साहब अपने करियर के शुरुआती दौर में संघर्ष कर रहे थे, तब उनकी मुलाकात गैरी संधू से हुई थी। गैरी संधू उनकी सुरीली और ऊंची पिच वाली आवाज़ को सुनकर इतने हैरान हुए कि उन्होंने आदर और सम्मान के तौर पर उन्हें 'खान साहब' कहकर बुलाना शुरू कर दिया। बाद में जब गैरी संधू ने उन्हें अपने साथ लॉन्च किया, तो यही नाम उनका परमानेंट स्टेज नेम बन गया, जिसकी चर्चा उन्होंने मशहूर कॉमेडी शो 'द कपिल शर्मा शो' में भी की थी।
हर बड़े कलाकार के बचपन की कुछ ऐसी कहानियां होती हैं जो उनके भविष्य का रास्ता तय करती हैं। खान साहब के साथ भी बचपन में स्कूल के दिनों में एक ऐसा ही वाकया हुआ था। वह अक्सर अपनी क्लास के पीछे बैठकर या लंच टाइम में दोस्तों के बीच ऊंचे सुरों में गाने गाया करते थे। एक बार उनके स्कूल के प्रिंसिपल और संगीत के टीचर ने उन्हें क्लास में गाते हुए सुन लिया। खान साहब को लगा कि उन्हें डांट पड़ेगी, लेकिन इसके विपरीत टीचर उनकी आवाज़ की गहराई देखकर दंग रह गए। उस दिन के बाद से स्कूल के हर छोटे-बड़े फंक्शन में स्टेज पर गाना गाने की जिम्मेदारी केवल इमरान खान को ही दी जाने लगी, जिसने उनके अंदर के डर को पूरी तरह खत्म कर दिया।
खान साहब अपनी गायकी का भगवान और सबसे बड़ा रोल मॉडल उस्ताद नुसरत फतेह अली खान (Ustad Nusrat Fateh Ali Khan) साहब को मानते हैं। वह अक्सर अपने इंटरव्यूज में बहुत गर्व से कहते हैं कि उन्होंने संगीत की कोई बहुत बड़ी प्रोफेशनल ट्रेनिंग नहीं ली है, बल्कि उन्होंने नुसरत साहब की कव्वालियों, सूफी गानों और उनके लाइव शोज़ की रिकॉर्डिंग्स को बार-बार सुन-सुनकर ही आलाप लेना और सुरों को साधना सीखा है। खान साहब का यह सपना है कि वह नुसरत साहब की तरह ही पूरी दुनिया के कोने-कोने तक सूफी संगीत को पहुंचाएं और एक दिन ग्लोबल लेवल पर वेस्टर्न आर्टिस्ट्स के साथ भी कोलाबोरेशन करें।
साल 2026 खान साहब के करियर के लिए एक ऐतिहासिक साल साबित हुआ है, क्योंकि इसी साल उन्हें बॉलीवुड की एक बहुत बड़ी और मच-अवेटीड फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' (Dhurandhar The Revenge) में काम करने का मौका मिला। आदित्य धर द्वारा निर्देशित और सुपरस्टार रणवीर सिंह अभिनीत इस फिल्म में खान साहब ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्लेबैक सिंगर के तौर पर अपनी आवाज़ दी है। इस बड़े प्रोजेक्ट ने खान साहब को रातों-रात नेशनल लेवल पर एक बहुत बड़ी पहचान दिला दी है और हिंदी सिनेमा के दर्शकों के बीच भी उनका नाम बेहद लोकप्रिय हो गया है।
फिल्म 'धुरंधर' में खान साहब ने जो गाना गाया है, वह कोई आम गाना नहीं है, बल्कि वह उनके खुद के रोल मॉडल उस्ताद नुसरत फतेह अली खान साहब के एक बेहद लोकप्रिय ओरिजिनल ट्रैक का ऑफिशियल रिक्रिएशन है। इस गाने का नाम "जान से गुजरते हैं" (Jaan Se Guzarte Hain) है, जिसे मशहूर संगीतकार शाश्वत सचदेव ने कंपोज किया है। इस गाने में खान साहब ने जिस तरह से सूफियाना अंदाज़ और हाई नोट्स का इस्तेमाल किया है, उसने यूट्यूब और सोशल मीडिया पर धूम मचा रखी है। इसके साथ ही फिल्म का एक और एनर्जेटिक ट्रैक "आरी आरी" (Aari Aari) भी काफी पसंद किया जा रहा है।
अगर खान साहब के अब तक के सबसे प्रसिद्ध गानों की लिस्ट देखी जाए, तो वह काफी लंबी और शानदार है। म्यूजिक डायरेक्टर पावे धारिया के साथ आया उनका गाना "ज़िंदगी तेरे नाल" (Zindagi Tere Naal) एक ऐसा ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर गाना है जिसे आज भी हर शादी और पार्टी में सुना जाता है और इस गाने को यूट्यूब पर करोड़ों में व्यूज मिले हैं। इसके अलावा उनके कुछ अन्य बेहद मशहूर गाने जैसे "नाराजगी" (Narazgi), "जी करदा" (Jee Karda), "रिम झिम" (Rim Jhim), "बेकद्रा" (Bekadra) और साल 2026 में रिलीज हुआ उनका नया सिंगल "पागल नहीं होना" (Pagal Nahi Hona) दर्शकों के दिलों पर राज कर रहे हैं।
खान साहब को बाकी पंजाबी गायकों से जो चीज सबसे अलग बनाती है, वह है उनकी गायकी की अनूठी शैली। जहां आज के दौर में ज्यादातर पंजाबी गायक पॉप, हिप-हॉप या गैंगस्टा रैप वाले गाने गा रहे हैं, वहीं खान साहब ने हमेशा शुद्ध सूफी संगीत, कव्वाली के टच और दर्द भरे गानों (Sad Songs) को ही अपनी प्राथमिकता बनाया है। उनकी आवाज़ में एक अजीब सा दर्द और रूहानियत महसूस होती है, जिसके कारण युवा पीढ़ी से लेकर बुजुर्गों तक, हर उम्र के लोग उनके गानों से खुद को बड़ी आसानी से जोड़ पाते हैं।
आज खान साहब जिस मुकाम पर हैं, वहां तक पहुंचने के लिए उन्होंने सालों तक कड़ा संघर्ष किया है। बिना किसी गॉडफादर के सिर्फ अपने हुनर के दम पर पंजाब के एक छोटे से गांव से निकलकर बॉलीवुड की बड़ी फिल्मों तक का सफर तय करना यह साबित करता है कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। आज के समय में खान साहब उन सभी नए और उभरते हुए गायकों के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा हैं जो अपनी जड़ों से जुड़े रहकर संगीत में कुछ बड़ा करना चाहते हैं। भविष्य में वह अपने फैंस के लिए कई और बड़े सिंगल्स और लाइव कॉन्सर्ट्स लाने की तैयारी कर रहे हैं।
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